डी एम मिश्र की चार गजलें 1 / जनसंदेश टाइम्‍स में प्रकाशित

गजल / फितरतों से दूर

51 दीपों की आरती करते हुएगोमती मित्र मंडल के सौजन्‍य सें । आदि गंगा गोमती के सीताकुण्‍ड घाट पर । मुख्‍य यजमान के रूप में कवि डॉ डी एम मिश्र। साथ में वरिष्‍ठ चिकित्‍सक डॉ सुधाकर सिेह जी। सहयोग श्री दिनकर सिेह जी , देचेन्‍द्र विक्रम सिेह व अन्‍य श्रद्वालु गण ।

साहित्यिक समाचार - --------------------------- साहित्यिक संस्‍था * सृजन -पीठ* , जिसका मैं संयोजक भी हूॅ के तत्‍वावधान में वरिष्‍ठ साहित्‍यकार कमलनयन पाण्‍डेय की पुस्‍तक -*सृजन में संदेश और व्‍यंग्‍य * का विमोचन हमारे बुजुर्ग मशहूर शायर अजमल सुलतानपुरी की अध्‍यक्षता मे हुआ । विद्वान प्रो डाॅ राध्‍ेाश्‍याम सिंह , डाॅ धर्मपाल सिेह, डॉ सुशील कुमार पाण्‍डेय * साहित्‍येन्‍दु, डॉजे पी सिंह , डाॅ मित्र भद्रसिेह, इन्‍द्र मणि कुमार , राज खन्‍ना आदि ने अपने विचार रखे । संगोष्‍ठी का संचालन पैर मे फ्रैकच्‍ार के कारण मुझे बैठकर करना पडा ।

सुप्रसिद्व पत्रिका इंडिया इनसाइड मे मेरी पुस्‍तक -- यह भी एक रास्‍ता है , की समीक्षा -समीक्ष्‍ाक --- ' वरिष्‍ठ कथाकार / आलोचक श्री नरसिेह नारायण

दैनिक ** जनसेवा मेल ,झॉसी ** मे प्रकाशित गजलें ।

लोक सरोकार समिति के तत्‍वावधान मे * गार्डेन व्‍यू होटल * में आयोजित । युगतेवर पत्रिका के -यदुराजबली *ऐश* विशेषॅाक के लोकार्पण अौर काव्‍य -संघ्‍या का संचालन करते हए

के;एन;आई; के हिन्‍दी - विभागाध्‍यक्ष व प्रखर आलोचक डॉ राधेश्‍याम सिंह जी ने मेरी पुस्‍तक ''यह भी एक रास्‍ता है '' की समीक्षा लिखी है , जिसे प्रतिष्ठित हिन्‍दी दैनिक ''जन संदेश टाइम्‍स '' ने प्रकाशित किया है ।

दो ताजा गजले प्रकाशित होकर आयी हैं । आपकी प्रतिक्रियायें सादर अपेक्ष्रित

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अपनी माटी
वर्ष-2, अंक-21 (जनवरी, 2016)
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ग़ज़ल: डॉ. डी.एम. मिश्र

1.
चित्रांकन-सुप्रिय शर्मा

गाँवों का उत्थान देखकर आया हूँ
मुखिया की दालान देखकर आया हूँ

मनरेगा की कहाँ मजूरी चली गई
सुखिया को हैरान देखकर आया हूँ

कागज़ पर पूरा पानी है नहरों में
सूख गया जो धान देखकर आया हूँ

कल तक टूटी छान न थी अब पक्का है
नया-नया प्रधान देखकर आया हूँ

लछमिनिया थी चुनी गयी परधान मगर
उसका ‘पती-प्रधान’ देखकर आया हूँ

बंगले के अन्दर में जाने क्या होगा
अभी तो केवल लॉन देखकर आया हूँ

रोज सदन में गाँव पे चर्चा होती है
‘मेरा देश महान’ देखकर आया हूँ
2.
नम मिट्टी पत्थर हो जाये ऐसा कभी न हो
मेरा गाँव, शहर हो जाये ऐसा कभी न हो।

हर इंसान में थोड़ी बहुत तो कमियाँ होती है
वो बिल्कुल ईश्वर हो जाये ऐसा कभी न हो।

बेटा, बाप से आगे हो तो अच्छा लगता है
बाप के वो ऊपर हो जाये ऐसा कभी न हो।

मेरे घर की छत नीची हो मुझे गवारा है
नीचा मेरा सर हो जाये ऐसा कभी न हो।

खेत मेरा परती रह जाये कोई बात नहीं
खेत मेरा बंजर हो जाये ऐसा कभी न हो।

गाँव में जब तक सरपत है बेघर नहीं है कोई
सरपत सँगमरमर हो जाये ऐसा कभी न हो।

डॉ. डी.एम. मिश्र
604, सिविल लाइन, निकट राणा प्रताप पी.जी. कालेज,सुलतानपुर-228001
मो0 9415074318,ई-मेल:dmmishra28@gmail.com

गुप्‍तारगंज के गॉव शिवनगर पूरे पलटन तिवारी में एक ** किसान संगोष्‍ठी **में मुख्‍य अतिथि के रूप में बोेलते हुए कवि डॉ डीएम मिश्र ।साथ में समाजसेवी करतार केशव यादव जी व कवि माधव प्रसाद यादव । आयेाजन किया - कवि गंगा प्रसाद यादव ' आत्रेय' ने ।

मित्रों ,----------- आपकी यह पसन्‍दीदा गजल ।

दोस्‍तो , मेरे पौत्र शिवांश ने'' कान्‍हा'' का यह पेन्सिल आर्ट बनाकर अपने स्‍कूल में दिखाया और प्रथम स्‍थान प्राप्‍त किया

ग़ज़ल डॉ डी. एम. मिश्र February 06, 2016

समंदर की लहर पहचानता हूँ क्‍या करूँ लेकिन
हवा का रूख बदलना चाहता हूँ क्या करूँ लेकिन
मुझे मालूम है जाना किधर है किस दिशा में, पर
मैं कश्‍ती की दशा भी देखता हूँ क्‍या करूँ लेकिन
जवानी थी कमाता था तो देता था तुम्‍हें बेटा
बुढापा आ गया तो माँगता हूँ क्‍या करूँ लेकिन
हुआ जो जुल्‍म मजलूमों पे उसको जानता हूँ मैं
कहाँ खामोश रहना चाहता हूँ क्‍या करूँ लेकिन
मुझे मालूम है किसने लगाई आग पानी में
धुआँ जो उठ रहा है देखता हूँ क्‍या करूँ लेकिन
जिधर भी देखता हूँ रास्‍ता सब बंद पाता हूँ
तेरे कूचे से जाना चाहता हूँ क्‍या करूँ लेकिन
— डॉ डी एम मिश्र

दोस्तो , एक और नई गजल प्रकाशित होकर आयी है । पेश है आपकी खिदमत मे --

मशहूर गजलकार डॉ डी एम मिश्र को आज उनके जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं..... ईश्‍वर आपकी हर मनोकामनाएं, सुख, शान्ति, समृद्धि और दीर्घायु बनायें..पेश है उनकी एक गज़ल..

गज़ल..
गजल / डॉ डी एम मिश्र -
मुहब्‍बत टूट कर करता हूॅ -
------------------------- 
मुहब्‍बत टूट कर करता हूॅ पर अंधा नहीं बनता
खुदा से भी मै अपने प्‍यार एकतरफा नही करता
चलो अच्‍छा हुआ जो झूठ पर से उठ गया परदा
वो मेरा हो नहीें सकता , मैं उसका हो नहीं सकता
हजारों साल की सब दुश्‍मनी मैं भूल जाता हूॅ
गले लगता हूॅ तो दिल में कोई दूरी नहीें रखता
भले सैयाद है फिर भी कहीें उसके भी दिल होगा
उसे भी कील चुभती है किसी का पंख जब कटता
मेरे कातिल तलक कोई मेरा पैगाम पहुॅचा दे
लहू ऑखों से जब टपके तो फिर ऑसू नहीं बहता
दिखे नन्‍हीं -सी चिन्‍गारी घरों में आग लग जाती
उसे मालूम होगा क्‍यों चिरागों से धुऑ उठता

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श्रद्वॉजलि / रोहित वेमुला की आत्‍मा के नाम --- गजल / डॉ डीएम मिश्र आज 24 जनवरी को यह गजल ** जनमोर्चा** दैनिक में प्रकाशित भी हुई।

दैनिक * जनसंदेश टाइम्‍स * में प्रकाशित यह गजल कुछ मित्रो की फरमाइश पर पोस्‍ट कर रहा हूॅ




 

झोपड़ी में हों या हवेली में

झोपड़ी में हों या हवेली में
सभी उलझे किसी पहेली में
है कोई पढके जो बता देता
क्‍या लिखा है मेरी हथेली में
भूखे बच्‍चों को कैसे बहलाऊँ
चार दाने तो हों पतेली में
खुद को मुखिया वो गॉव का कहता
जहर देता है गुड की भेली में
जिंदगी की किताब पढ न सके
कट गयी उम्र ही अटखेली में
उसकी खुशबू कहॉ तलाश करूॅ
वो न बेला न वो चमेली में

पुरुषोत्तम के कमरे में .....

रोज़ किसी की शील टूटती पुरुषोत्तम के कमरे में
फिर शराब की बोतल खुलती पुरुषोत्तम के कमरे में

गाँव की ताज़ी चिड़िया भून के प्लेट में रखी जाती है
फिर गिद्धों की दावत चलती पुरुषोत्तम के कमरे में

अन्दर में अँगरक्षक बैठे , बाहर लगे सुरक्षाकर्मी
हवा भी आने से है डरती पुरुषोत्तम के कमरे में

बड़े-बड़े नेता और अफ़सर यहाँ सलाम बजाते हैं
क़िस्मत बनती और बिगड़ती पुरुषोत्तम के कमरे में

घपला और घोटाला वाली भले तिजोरी कहीं रहे
चाभी मगर यहीं पर रहती पुरुषोत्तम के कमरे में

फिर क्या ग़रज पड़ी रावण को सीता का वह हरण करे
उसे यहीं हर सुविधा मिलती पुरुषोत्तम के कमरे में

................डॉ डी एम मिश्र
 —Kumar Sharma and 41 others.
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Mukesh Shukla Dada pranaam. A mera saubhagy hai ki fb per me iss rachna se juda raha. Sach to a hai iss rachna ne iss kalkhand k vidruptam saty ko ukera hai . Iss rachna ne iss daur k rachnakaaro ko marg dikhakr unki jimmedari ka ahsas karaya hai..
Kavi Dm Mishra मित्रो , आप सबका तहेदिल से शुक्रिया । इसके पहले यह गजल -अत्‍यन्‍त लोकप्रिय * गजल- कविता मंच ** की टाइमलाइन पर पोस्‍ट थी जो अब कतिपय कारणो से डिलीट हो गयी है 1 उस समय यह पोस्‍ट सर्वाधिक लोकप्रिय हुई थी -- 1650 लाइक , 1500 लोगों के कमेट और 650 शेयर्स थे ।
Kavi Dm Mishra आदरणीय Rajkishore Pandey Ji इतने स्नेह के लिए सादर आभार । मुझे संदेह हो रहा है कहीं आप इसे मर्यादा पुरूषोत्तमजो श्राीराम जीकेलिए प्रयुक्‍त होता है वह समझने की भूल तो नहीं कर रहे । ये पुरूषेात्‍तम नामधारी एक पूर्व विधायक है
Kavi Dm Mishra भाई विक्रमजी छाजेड जी ।वह बाॅदा का पूर्व विधायक इस समय इसी जुर्म में दस साल की जेल काट रहा है । ये चर्चित काांड है । निर्भया कांडकी तरह।रावण उस के एक साथी का नाम है । यह सत्‍य घटना पर आधारित है । पोस्‍ट LIKE कर दे ।शायद छू ट गयाा है
Surendra Sharma Suman आदरणीय महेन्द्र प्रताप सिँह जी .कितने पुरुषोत्तमोँ के कमरे गिरवायेँगे आप या हम।असंभव
Kavi Dm Mishra आभार भाई Devendra Soni Ji. शील ',अश्लील शब्द तो है नही । वैसे यह वास्तविक पीडिता का नाम भी है जैसे पुरूषोत्तम असल अभियुक्त का नाम है
    Kavi Dm Mishra