आ धमके साले- बहनोई होली में
बजट कर गया साफ रसोई होली में। - बच्चों की मॉ की फरमाइश थमी नहीें मैंने भी पीकर सुध खेार्इ होली में ।
वो ख़ुमार , वोे नशा चढ़ा इस फागुन में
लगता नहीं पराया कोई होली में ।
वो गूलाल , वो रंग उड़ा पिचकारी से
जगी कामना थी जो सोई होली में ।
दीवाने पड़ गये हैं लँहगा के पीछे
चूनर- चोली खूब भिगोई होली में।
हम तो जनम-जनम के रसिक हमारा क्या
संतों ने भी कंठी खेाई होली में ।
मदन राग से सारा उपवन गूॅज उठा
तू भी छेड़ कबीरा कोई होली में ।
मगर सलहजें वादा करके चली गयीं
फिर आयेंगे हम ननदोई होली में ।
---- डॉ डी एम मिश्र
..
Type a message...
|