गजल
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रक्त का संचार है पर्यावरण
साँस की रफ़्तार है पर्यावरण।
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रक्त का संचार है पर्यावरण
साँस की रफ़्तार है पर्यावरण।
फूल , फल या छाँव की ख्वाहिश अगर
तो प्रकृति का प्यार है पर्यावरण।
तो प्रकृति का प्यार है पर्यावरण।
उन परिन्दों के लिए भी सोचिए
उनकी भी दरकार है पर्यावरण।
उनकी भी दरकार है पर्यावरण।
मन खिले, आँगन खिले, उपवन खिले
फिर है क्या तैयार है पर्यावरण ।
फिर है क्या तैयार है पर्यावरण ।
जन्म से लेकर मरण तक साथ दे
जिंदगी का सार है पर्यावरण।
जिंदगी का सार है पर्यावरण।
पेड़ रोया , पर कुल्हाड़ा देखकर
किस क़दर लाचार है पर्यावरण।
किस क़दर लाचार है पर्यावरण।
एक पौधा आप भी आकर लगायें
प्रकृति का श्रृंगार है पर्यावरण ।
प्रकृति का श्रृंगार है पर्यावरण ।
Dr DM Mishra