सरस्‍वती वंदना 2

सरस्‍वती वंदना
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मइया तोहरे दुआरे भईं भीर पसारौ जग्‍य आपनि‍ हो ।

बडे-बडे  तोहरे सपूत उतारैं तोहरी आरती हो
चहुॅदि‍शि‍ जस कै पताका फहराय मइया भारती हो
मइया  तोहरी कि‍रति‍ कै बखान करत न अघाय जि‍हवा
सरवस तुॅह पै लुटाय कै फूला न समाय मनवा
 मइया गुन ढॅग हमरे न एक उबारौ जग्‍य आपनि‍ हो ।

वि‍धि‍ कै दुलारी कल्‍यानी मइया घट-घट वासि‍नी हो
हम पै तोहार उपकार बडा स्‍वर- सुर दायि‍नी हो
नाम लै तोहार मि‍टै कलुष हमार हॅसवाहि‍नी हो
खुलै ज्ञान और बुद्धि‍ कै कपाट वीणावादि‍नी हो ।
भूल हमसे न कउनो होइ जाय सॅभारौ जग्‍य आपनि‍ हो ।